- Get link
- X
- Other Apps
Posts
फूलों की देखो
- Get link
- X
- Other Apps
प्रसन्नता फूलों की देखो, कभी न भूलते हैं मुस्काना। चाहे तन झुलसे धूप में, चाहे ओस से बड़े नहाना। मधूरता फूलों की देखो, लगी फैलाए मीठी गंध। कीचड़ में भी जन्म लेकर, नहीं त्यागते कभी सुगंघ। कोमलता फूलों की देखो, कर पल रखते कोमलता भाव। चुभ जाते जब संग के काँटे, कभी भूल न करते ताव। चपलता फूलों की देखो, रखते मन में सदा उमंग। संकट में भी खुश हैं करते, झम ,नाच हर रितु के संग। धीरजता फूलों की देखो, दुःख पाकर भी धीरज रखते। तोड़ ले उनको डाली से कोई, फिर भी उसको कुछ न कहते। सहनसीलता उनकी देखो, पीड़ित हो भी हसते रहते। दंशित होकर भी भौरों से, हँस- हँस फब्ती कसते रहते। महानता फूलों की देखो, तनिक नहीं करते अभिमान। रंक-धनी का भेद न करते, सबको मनाने एक समान। फूलों के गुण अपनाकर, तुम भी महानता बन दिखलाओ। कर्म करो अच्छे-अच्छे, अच्छाई को अपनाओ। साभार, सुजाता प्रिय