स्वप्न.... स्वप्न स्वप्न सुनहरे जीवन के हो जाएँ साकार। मानव का मानव जन से रहे सदा ही प्यार। ऊँच-नीच का भेद हमारा जड़ से ही मिट जाए। छल-कपट सा दुर्गुण जग में कभी न आने पाए। सच्चाई की स्वर्ण- पताका जग- भर में लहराए। झूठ,फरेब,मक्कारी जल के बुलबुले सा ढह जाए। शान-घमंड,विद्वेष भावना कभी न आए पास। सब पर सबको -मोह रहे सब पर सदा विश्वास। परहितकारी कर्म में तनिक नहीं संशय हो। सुख पहुचाऊँ सदा सभी को मन में दृढ़ निश्चय हो। सुजाता प्रिय
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
कहती खूब कहानी जी----- मेरी बूढ़ी नानीजी। कहती खूब कहानी जी। कभी सुनहरी परियों वाली, चुनरी ओढ़े परियों वाली, पेड़ों पर की चिड़ियों वाली, जिसकी मीठा वाणी जी। कोई भूत- पिशाचों वाली, जादू- खेल तमाशों वाली, जमींदार और दासों वाली, बातें सभी पुरानी जी। कुछ में भालू - बंदर होेते, सिंह पिंजरे के अंतर होेते, कुछ में अंतर -मंतर होेते, कुछ में राजा- कहानी जी। फूलों और गुलदस्ते वाली, हल्वे - पूरी नस्ते वाली , छोटी- मोटी सस्ते वाली, करते आना- कहानी जी। सुजाता प्रिय